भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी

यह भारत के लिए बहुत गर्व की बात है कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे भारत रत्न हमे प्राप्त हुएअटल जी बहुत सारी कलाओ के धनी हैं जैसे कि वह एक अच्छे वक्ता थे और साथ- साथ एक अच्छे श्रोता भी थेउन्हें उनके ज़माने में   मनाली की हसीन वादियों के बीच कवितायेँ लिखना बहुत पसंद था|अटल जी कहते हैं कि कविता उन्हें विरासत में मिली हैउनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत के अपने ज़माने के जाने-माने कवियों में थेअटल बिहारी वाजपेयी जी कि अग्रज भी कविताए लिखते थे| अटल बिहारी वाजपेयी जी कि कई काव्य रचनाये प्रसिद्ध हैं जिनमे ‘गीत नहीं गाता हूँ’ ‘परिचय’ ‘आओ फिर से दिया जलाये’ शामिल हैंउनके बहुत सारे काव्य संग्रह प्रकाशित हुए हैजो कि बहुत प्रसिद्ध हैवाजपेयी जी कहते है कि अगर वो राजनीति में ना आते तो वह कवि बनते| अटल जी कि आवाज़भाषण और कविताओ की दुनिया दीवानी हैअटल जी ने सदा कविता लिखने कि प्रेरणा देश की घटनाओ को रखा, कभी कभी वह सामाजिक विषयों पर भी टिप्पणीपूर्ण कविताये लिखते थे|
वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे और सन् १९६८ से १९७३ तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी  रह चुके हैं। सन् १९५५ में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ापरन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् १९५७ में बलरामपुर से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् १९७७ से १९७९ तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी। वह ३ दशको से ज्यादा सांसद रहे| १९८० में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की थी। जब ६ अप्रैल १९८० में भारतीय जनता पार्टी बनी तब उसका अध्यक्ष पद भी वाजपेयी जी को सौंपा गया। अटल जी दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी एवं देश कि चहीते सांसद, वक्ता, कवि ने सन् १९९७ में प्रधानमन्त्री के रूप में शपथ ली और देश की बागडोर संभाली परन्तु पहली सरकार १६ दिनों में ही नस्मस्तक हो गयी क्योंकि उनकी सरकार को बहुमत नहीं मिला। फिर १९ अप्रैल १९९८ को अटल जी की सरकार १३ पार्टियों के गठबंधन के साथ बहुमत से अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम पाए| इस १३ पार्टियों के गठबंधन से एन०डी०ए० का गठन हुआ जिसका श्रेय वाजपेयी जी को जाता है| अटल जी के नेतृत्व में देश कि पहली गठबंधन सरकार ने ५ साल केंद्र में सरकार चलाई| अटल राज में कई विकास कार्यो पर अमल किया गया जैसे १८ मई १९७४ का भारत का पहला सफल परमाणु बम परिक्षण जी कि पोखरन में स्व० डॉ० कलाम जी के नेतृत्व में हुआ| उनके राज में देश ने बहुत बड़ा भूकंप २००१ और २ चक्रवात, भयंकर बाढ़ सही फिर भी उन्होंने हमारे देश के सकल घरेलु उत्पाद को कम नहीं होने दिया| अटल जी ने हमारे विदेशी संबंधो को भी सुधारने का बहुत प्रयत्न किया जो कि व्यापार की दृष्टि से बहुत फायदेमंद था| वाजपेयी जी ने चीन के साथ भी संबंध सुधारने का प्रयत्न किया| अटल जी ने पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए प्रथम भारत-पकिस्तान बस सेवा दिल्ली-लाहौर बस सेवा को शुरू की| अटल जी ने दिल्ली मेट्रो सेवा को भी हरी झण्डी दिखाई और देश में कई ऐसे विकास कार्यो को हरी झण्डी दिखाकर भारत रत्न के हकदार बने| और तो और भारत को चाँद पर ले जाने वाले भी वाजपेयी जी हैं| २००८ में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र श्रीहरिकोटा से देश का प्रथम अंतरिक्षयान चंद्रयान १ को सफल परिक्षण किया| इसमें कोई दोराए नहीं है की श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी एक बेहद अच्छे कवि, एक अच्छे और सफल सांसद और एक दूरदर्शी नेता और प्रधानमंत्री रहे है| इनका समय सुशासन का समय था और २०१५ में सरकार ने प्रति वर्ष वाजपेयी जी के जन्मदिवस २५ दिसंबर को सुशासन दिवस मानाने का ऐलान किया है|




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