एक कवि की कल्पना

नयी कविता
एक कवि की कल्पना
एक कवि की कल्पना
सोचता हूँ लिखूँ क्या?
ऐ मेरे कलम बता|

सत्य, अहिंसा या फ़ुटबाल
क्या लिखू अब तू बता|
नींद में क्या लिखूं, जागते पे क्या लिखूं|
क्या लिखूं ऐसा जो
हाल-ए-जम्मू बदल दे|
क्या लिखूं ऐसा जो
तकदीर-ए- हिंदोस्ता बदल दे|
है अगर ताकत तुम्हारे बाजुओ ए मित्र (पाकिस्तान)
तो आज शिव के केश से 'यमुना' निकलनी चाहिए|
सोचता हूँ क्या लिखूं?
ए मेरे कलम बता|
~ईशान शर्मा

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