ज़िन्दगी - एक मेले से कुछ ज़्यादा

ज़िन्दगी - एक मेले से कुछ ज़्यादा 



ईशान शर्मा
शायद आपने वो मोहम्मद रफ़ी का वो गाना तो सुना ही होगा, 'ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया में कम न होंगे, अफ़सोस हम न होंगे', यह गाना मुझे मेरे दादा ने सुनाया था, और मेला वही रहा पर अब दादाजी तो नहीं है पर यह गाना है और मुझे हमेशा एक शक्ति देता है वैसे गाना काफी डिप्रेसिंग है| 

ज़िन्दगी की समझ अभी नाम मात्र होगी पर फिर भी दिल्ली शहर में पढाई करना और ज़िन्दगी का कुछ प्रतिशत मतलब जानना एक बराबर है| ज़िन्दगी एक मेले जैसी तो है पर उससे कुछ ज़्यादा भी है, अब मेरे कहने से आप कोई बात क्यों मानेंगे, तो चलिए में बताता क्यों ज़िन्दगी मेले से कुछ ज़्यादा है| मेला एक स्थान पर होता है और ज़िन्दगी जो है वो  मैदान जितनी बड़ी नहीं बल्कि इस पृथ्वी जितनी है, ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव, मेले में  लगे झूलों से भी ज़्यादा होता है, खैर मेला है तो आनंद भी है, दुःख भी होना चाहिए, अगर जीत है तो पराजय भी अवश्य होनी  चाहिए और मैं तो समझता हूँ कि ज़िन्दगी भागती हुई होनी चाहिए क्योकि रुकना तो मृत्यु का चिन्ह माना जाता है| यह ज़िन्दगी दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर भागते लोगों से हज़ारों गुना ज़्यादा रफ़्तार से भागती है और दोस्त यहाँ मेट्रो आती तो है पर कभी खाली नहीं, सफर आप तय तो ज़रूर करेंगे पर अकेले नहीं, मुझे इधर निदा फ़ाज़ली साहब का वो कलाम याद आ रहा है कि - सफर में धूप तो होगी जो निकल सको तो चलो,  सभी है भीड़ में तुम भी चल सको तो चलो| 

हम सब इस मेले में वो बच्चे है जो इधर उधर दौड़ लगाते रहते है और शायद कभी कहीं गलती है इस मेले में खो जाएँ क्योकि मैंने पहले ही बताया कि यह ज़िन्दगी एक मेले से कुछ तो ज़्यादा है, तो एक रोज़ में दिल्ली मेट्रो से अपने महाविद्यालय जा रहा था, जब मेरी कलम से कुछ मैंने अपनी किताब पर कुछ लिखा था -

खो मत जाना इस मेले में 
भीड़ बहुत है,
छोटा कंकाली तन 
मन में मेले के रंग ताज़े,
पर पीछे इसके काले धागे 
रे, रंग मत जाना इस मेले में 
खो मत जाना इस मेले में| 

मैं सबसे कहूंगा की इस मेले में कभी अपने आप को मत खोइए, किसी और की तरह बनने की दौड़ में आप अपने जैसे बनने की दौड़ से न बाहर हो जाएँ इसका ध्यान आपको रखना होगा, लोग खूब कहेंगे पर -

बातें खूब करेंगे निगोड़े
रे, बातों पर मत जाना 
खो मत जाना इस मेले में,
खो मत जाना| 

रास्ते भटकाते लोग कई 
सबसे चंट बनेंगे,
रे, होशियार हो जाना इस मेले में 
रे, खो मत जाना इस मेले में| 

मेले में चटक रंग बिखरते रहेंगे 
प्रीत पा लोग हॅसते रहेंगे 
दूर के ढोल खुश करते रहेंगे 
रे, डूब मत जाना इस मेले में 
रे, खो मत जाना इस मेले में | 

सपना सा है, जीवन नहीं 
इस सपने में सो मत जाना 
खो मत जाना इस मेले में| 


ख़ैर आज के लिए काफी है !

आपका,

ईशान शर्मा 
eshansha@gmail.com 


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